
उत्तराखंड उपचुनाव पर दिल्ली हाई कमान की पैनी नज़र !
बागेश्वर में डाल – डाल, पात – पात स्पर्धा कहीं बीजेपी को वॉकओवर तो नहीं ।
दिनेश शास्त्री की रिपोर्ट
बागेश्वर विधानसभा उपचुनाव बेशक अभी नामांकन से दूर है लेकिन पूर्व की
स्थिति दिलचस्प बनी हुई है।
कांग्रेस यहां अपनों की कीमत पर दूसरे दल से आयातित प्रत्याशी पर दांव खेलने
जा रही है।

एक बार बसपा और एक बार आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके,
बसंत से पार्टी में हरियाली लाने की कोशिश है।
कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी रंजीत दास अब भाजपा में हैं सो पहली लड़ाई,
कांग्रेस हार चुकी है।
संकेतों के अनुसार कांग्रेस एक कारोबारी पर दांव लगा रही है।
पिछले दो चुनावों में उसकी निजी उपस्थिति बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं दिखी है।
भाजपा का इस उपचुनाव को लेकर गणित क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है
लेकिन कुमाऊं की राजनीतिक हलचलों पर पैनी नजर रखने वाले पत्रकार नवीन जोशी
मानते हैं कि कांग्रेस गोत्र के पूर्व पराजित प्रत्याशी पर भाजपा शायद ही दांव खेले।
रंजीत दास के वोट बैंक और प्रतिष्ठा का लाभ इस चुनाव में उठाया जाएगा।
कोई शक नहीं – टिकट दिवंगत चंदन राम दास के परिवार से ही किसी को
मिलना है। चंदन रामदास की पत्नी और बेटे के फ्लेक्स क्षेत्र में पहले ही टंग चुके हैं।
सूत्रों की मानें तो पैनल में चंदनराम दास के परिवार का पहला स्थान है।
भाजपा अपने वरिष्ठ विधायक और दिवंगत नेता के प्रति सहानुभूति हर हाल में भुनाना चाहेगी।
चर्चा है – रंजीत दास को आभास हो गया कि इस बार टिकट नहीं मिलने वाला
तो भाजपा से सेटिंग कर ली।
कांग्रेस से भगदड़ के परिदृश्य ने भाजपा को मजबूती दी है।
बागेश्वर सीट पर 14 फरवरी 2022 को मतदान हुआ और परिणाम 10 मार्च को घोषित हुए।
चंदन राम दास ने इस सीट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।
वर्ष 2017 में भी पांच उम्मीदवार मैदान में थे। तब भी भाजपा के चंदन राम दास ने ही
यहां से जीत दर्ज की।
एकतरफा मुकाबला में भारतीय जनता पार्टी के चंदन राम दास ने कांग्रेस के बालकृष्ण
भारी अंतर से चुनाव जीत लिया था।
वर्ष 2012 में भी भाजपा के चंदन राम दास ने कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को हराया था।
दूसरे शब्दों में वर्ष 2007 से भाजपा के चंदन रामदास अजेय बने हुए हैं।
इस बार 17 अगस्त तक बागेश्वर उपचुनाव के लिए नामांकन होना है।
5 सितंबर को वोटिंग और 8 सितंबर को नतीजे घोषित होंगे।
उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला तय है।
करीब 665 वर्ग किलोमीटर में फैला ये निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए
आरक्षित है। यहां करीब सवा लाख मतदाता हैं।
उपचुनाव और बरसात के कारण मतदान कम रह सकता है।
बहरहाल भाजपा और कांग्रेस में नेताओं के लिए सैंधमारी जारी है।
कांग्रेस के पास इस उपचुनाव में नेताओं की पकड़ साबित करने का बेहतरीन मौका है।
उपचुनाव में कांग्रेस की ढिलाई वॉक ओवर बन सकती है।
— दिनेश शास्त्री सेमवाल
(लेखक वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार हैं।)