कोरोना, मंहगाई, पलायन, बेरोजगारी पांच साल का बहीखाता या फिर से बीजेपी सरकार !
हरीश रावत का बनवास बढ़ा पायेंगे मोदी - अमित शाह या प्रियंका बनेगी कांग्रेस का भाग्य।

कोरोना, मंहगाई, पलायन, बेरोजगारी पांच साल का बहीखाता या फिर से बीजेपी सरकार !
हरीश रावत का बनवास बढ़ा पायेंगे मोदी – अमित शाह या प्रियंका बनेगी कांग्रेस का भाग्य।
मतदान के लिए 14 फरवरी वैलेंटाइन डे धामी सरकार को उपहार या कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए शुभ दिन बनता है – मतदान परिणाम जानने के लिए 10 मार्च तक लंबा इंतजार है।
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही कांग्रेस मुक्त भारत का अभियान परवान चढ़ने लगा था। अब यह लहर ठहर गई है।
2017 में कांग्रेस की उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पराजय का अभूतपूर्व रिकार्ड बना है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 5-0 की बढ़त बनायी।
मार्च 2020 में कोरोना की पहली लहर ने देश को झिंझौड़ना शुरू किया। प्रवासी उत्तराखंडी देश से घर – गांव लौटने लगे तो शासन – प्रशासन नाकारा साबित होने लगा।
सुराज और सुचिता की पोल खुलने लगी। कांग्रेस और विपक्ष की वापसी सत्ता में होने लगी।
आंध्रप्रदेश, केरला, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, उड़ीसा, दिल्ली आदि प्रदेशों में बीजेपी जीत से वंचित रह गई। गुजरात, बिहार में जीत का मार्जिन कम हुआ।
मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, मणिपुर, अरूणाचल में दलबदल से बीजेपी की सरकार बनी।
ऐसा लगा बीजेपी अब सत्ता से कम कुछ नहीं चाहती है। बीजेपी में कांग्रेसी नेताओं और ब्यूरोक्रेटस की एंट्री निर्विघ्न जारी है।
लेकिन 2021 में बंगाल चुनाव के बाद बीजेपी सांसद व मंत्री बाबुल सुप्रीयो ने मोदी – अमित शाह से बगावत कर तृणमूल काँग्रेस में ममता बनर्जी की शरण ली।
ममता बनर्जी की रिकार्ड जीत ने मोदी मैजिक को खत्म किया है।
कोरोना महामारी और एक साल तक चले किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की वापसी ने मोदी सरकार की पकड़ को कमजोर साबित किया है।
अब उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में भी परिवर्तन की बयार बहने लगी। उत्तराखंड में यशपाल आर्य व हरक सिंह रावत बीजेपी छोड़कर फिर कांग्रेस में लौट आए हैं। इन मौसम विज्ञानी नेताओं ने उत्तराखंड में सबसे ज्यादा सत्ता सुख लिया है।
कोरोना की दूसरी लहर के बीच हिमाचल प्रदेश की तीन विधानसभा और एक मंडी लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत पायी है।
किसान आंदोलन, सुशासन, मंहगाई, बेरोजगारी और कोरोना पड़ोसी हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की जीत के आधार बने हैं।
पांचवी विधानसभा के आम चुनाव में कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और उत्तराखंड क्रांति दल अपना खाता खोलने के लिए उतरे हैं।
14 फरवरी मतदान के दिन बीजेपी या कांग्रेस सरकार के बीच मुख्य मुकाबला है। कहीं निर्दलीय और अन्य दल भी जीत – हार का पासा पलट सकते हैं।
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड में घूम – घूमकर वोट मांगे हैं। वर्चुअल रैली और संगठन की शक्ति अलग से झोंकी गई।
धनबल और संसाधनों में बीजेपी के आगे कांग्रेस और अन्य दल चुनाव प्रचार में बौने ही साबित हुए हैं। दूसरे शब्दों में उत्तराखंड सहित पांच साज्यों में 2022 के विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए 2024 का सेमीफाइनल है।
- भूपत सिंह बिष्ट