उत्तराखंड चुनाव 2022 : नागफनी फल, कांटेदार नाशपाती या रामफल !
ऋषिकेश में कांग्रेस का नया चेहरा कुछ को रास नहीं आ रहा तो कभी बीजेपी विधायक प्रेम अग्रवाल भी नए नवेले थे।

उत्तराखंड चुनाव 2022 : नागफनी फल, कांटेदार नाशपाती या रामफल !
ऋषिकेश में कांग्रेस का नया चेहरा कुछ को रास नहीं आ रहा तो कभी बीजेपी विधायक प्रेम अग्रवाल भी नए नवेले थे।
स्वर्गाश्रम ऋषिकेश में यात्रियों को बहुत सुखद अनुभव होते हैं। गंगा नदी पर यहां लक्ष्मण झूला पुल, राम झूला पुल के बाद जानकी झूला पुल यानि तीसरा पुल अब मुनीकीरेती ऋषिकेश से स्वर्गाश्रम ऋषिकेश की ओर जाने के लिए तैयार है।
लगभग 36 करोड़ की लागत से बने इस (लोकल नामकरण अब सीता झूला) पुल का लोकार्पण पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 20 नवंबर 2020 में किया है। पुल का निर्माण 2013 में आरम्भ हुआ था।
सीतापुल ने ऋषिकेश की सुंदरता के साथ पर्यटन में नए आयाम जोड़ दिए हैं। हां, इस पुल पर दो पहिए के यातायात के लिए बनायी गई व्यवस्था पैदल तीर्थयात्रियों के लिए खलल बनती है क्योंकि पद यात्रियों के लिए मार्ग तंग हो गया है।
पुल के पास राम फल की बिक्री करते स्थानीय युवा आकर्षित करते हैं। बड़े जामुन जैसा दिखने वाला फल , बाजार में नया – नया है।
पांच रूपये प्रति नग के हिसाब से नमक मसाला लगाकर बेचा जा रहा राम फल बीज से भरा है और शायद निगलकर खाया जाता हैं क्योंकि गूदा तो इस में ना के बराबर है।
स्थानीय फल बताकर बेचा जा रहा यह रामफल राजनीति की तिकड़मबाजी जैसा दिखता है। प्रयास करने पर ज्ञात हुआ कि इस की आमद नीलकंठ और डोइवाला से होती है।
काफी जद्दोज़हद के बाद राजखुला कि यह कैक्टस – नागफनी पर लगने वाला फ्रूट ही है — प्रिकली पियर कहते हैं। इसे नागफनी फल कह सकते हैं जो कि आनलाइन मार्केटिंग में एमेजान और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है।
दावा है कि शूगर, क्लोस्ट्रोल, वजन घटाने में काम आता है लेकिन इस का दुष्प्रभाव उलटी, पेट खराब या कुछ समय के लिए लकवा ग्रस्त कर सकता है। नागफनी फल को काँटे हटाकर खाने लायक बनाया जाता है।
माँ गंगा के सानिध्य में राफ्टिंग, स्नान, ध्यान और अर्चना करते देशवासी अपनी सनातन परम्परा को पूरी आस्था से जी पा रहे हैं।
उत्तराखंड चुनाव 2022 की राजनीति में भी वोटरों को छांटकर और जानकर ही फल का चयन करना है।
— भूपत सिंह बिष्ट