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उत्तराखंड आंदोलन – मसूरी शहादत की 27 वीं वर्षगांठ !

मसूरी के अमर शहीदों को शत - शत नमन !

उत्तराखंड आंदोलन – मसूरी शहादत की 27 वीं वर्षगांठ  !

मसूरी के अमर शहीदों को शत – शत नमन !

वर्ष 1994, एक सितंबर — खटीमा और दो सितंबर —मसूरी की शांत वादियों में पुलिस की नृशंस गोलीबारी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके अमर शहीदों का एक स्वर्णिम इतिहास रचा है।

किसी भी सामाजिक आंदोलन में सरकारी हिंसा और दमन का मुकाबला करने के लिए मातृशक्ति और युवाओं का मैदान में आना, लक्ष्य हासिल करने तक नहीं रूका। कुछ ऐसी है — उत्तराखंड राज्य आंदोलन की पृष्ठभूमि !

तब बड़ी उम्मीद जगी – उत्तर प्रदेश में पहाड़ की आवाज़ सुनी नहीं जा रही है। अपने छोटे राज्य में युवाओं को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल, टूरिज्म, बिजली – पानी हर क्षेत्र में विकास के पैमाने पर हम देश में सब से अग्रणी बनेंगे। आज तो 62 हजार करोड़ का कर्जा है और प्रचंड बहुमत की सरकार में पांच साल में तीसरा मुख्यमंत्री कुर्सी संभाले हुए है।

उत्तराखंड राज्य अपने अमर शहीदों की उम्मीदों और सपनों को जल्दी से साकार करे — विकास की बयार देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर और नैनीताल जनपद के बाहर अब पहाड़ी जनपदों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पानी, सड़क के पैमानों पर खरी उतरे। उत्तराखंड में सबसे पहले अपने नागरिकों की खुशहाली के लिए योजनायें बने।

जो दरिंदो की कतारों में खड़े हैं आजकल,   उंगलियां उन पर उठाती हिमालय की बेटियां !

 

हीद वीरांगना – श्रीमती बेलमती चौहान , 48 वर्ष,

धर्मपत्नी धर्म सिंह चौहान,
ग्राम – खलोन, पट्टी धार अकोदया,
टिहरी गढ़वाल।

 शहीद वीरांगना – श्रीमती हंसा धनाई, 38 वर्ष,

धर्मपत्नी भगवान सिंह धनाई,

ग्राम बमद्वार, पट्टी धारमंडल,  टिहरी गढ़वाल।

 

पनप रहा क्यूं देश में ये खून तंत्र है,  क्या इसी का नाम, आज प्रजातंत्र है !

 

 

शहीद श्री राय सिंह बगारी, 54 वर्ष,
ग्राम तोडेरा, पट्टी पूर्वी भरदार,
टिहरी गढ़वाल।

 

 

शहीद श्री धनपत सिंह, 50 वर्ष,
ग्राम गंगवाड़ा, पट्टी गंगवाड़स्यूं,
गढ़वाल।

 

इन धधकती चोटियों की एक लंबी है व्यथा,  पीर कितनी सह रहे हैं, क्या किसी को है पता !

 

 

 

शहीद श्री मदनमोहन ममगांई, 45 वर्ष,
द्वारा हैमर एंड कंपनी,
नाजगली, कुलड़ी, मसूरी.

 

शहीद श्री बलबीर सिंह नेगी, 22 वर्ष,
सुपुत्र श्री भगवान सिंह नेगी,
लक्ष्मी मिष्ठान भंडार,
लाइब्रेरी, मसूरी।

काव्यांश आभार चंदन सिंह नेगी,
पदचिह्न टाइम्स।

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