10 अक्टूबर मानसिक स्वास्थ्य दिवस – विश्व में हर आठवां मनोरोगी !
शरीर और मन दोनों स्वास्थ्य अनिवार्य, मनोरोग को समय पर पहचान लेने से ईलाज और सुरक्षा आसान हो जाती है।

10 अक्टूबर मानसिक स्वास्थ्य दिवस – विश्व में हर आठवां मनोरोगी !
शरीर और मन दोनों स्वास्थ्य अनिवार्य, मनोरोग को समय पर पहचान लेने से ईलाज और सुरक्षा आसान हो जाती है।
देहरादून के प्रमुख मेडिकल कालेज और हास्पीटल की मनोरोग विशेषज्ञ बताती हैं – फिजिकल और मैंटल दोनों हेल्थ सामान्य जीवन के लिए परम आवश्यक हैं।
10 अक्टूबर – विश्व मैंटल हेल्थ डे के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते बढ़ती चिंता और मनोरोग की त्रासदी को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है।
सामान्यता हम अपना शारीरिक स्वास्थ्य मजबूत करने में जुटे हैं। मनोरोग और मानसिक स्वास्थ्य की चिंता अब धीरे – धीरे घर कर रही है।
ओसीडी – सीजोफ्रिनेया अब डिप्रेसन और तनाव के साथ जुड़ते जा रहे हैं।
विश्व का हर आठवां आदमी मानसिक रोग से ग्रस्त है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए देशों में कम संसाधन होने से बड़ी आबादी मनोरोगों में पड़कर जान तक गवां रहे हैं।
मनोरोगियों को समय पर सलाह और चिकित्सा न मिलने से उन का जीवन नारकीय है।
मनोरोग सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं – हर उम्र के लड़के – लड़किया, युवा, महिला, अधेड़ सब इस की चपेट में आ चुके हैं।
विश्व में आर्थिक विषमता, बेरोजगारी, पलायन, सामाजिक बुराइयां, हिंसा व शोषण आदि सीधे मानसिक तनाव और अवसाद के कारण हैं।
मानसिक रोगी एकांत पसंद, भूखे रहना, नींद न आना, बातचीत में गुस्सा होना, आपा खो देना या लगातार मूड स्विंग यानि ज्यादा चुप रहना, अकेले बात करना, अकेले हंसना, मोबाइल स्क्रीन में उलझे रहना, पूरे वाक्य न बोल पाना आदि लक्ष्णों से परिजन की पहचान में आ जाते हैं।
मनोरोग विशेषज्ञ सामान्य टेस्ट से मानसिक रोगी की पहचान कर लेते हैं।
बीमारी के कारण आनुवांशिक या अब मोबाइल पर घंटो बीताने की आदत हो सकती है।
खेलकूद या व्यायाम न करना, संवाद हीनता, पौष्टिक भोजन न करना और सामाजिक क्रियाकलापों से दूर रहने पर मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होता है।
फिल्म स्टार दीपिका पादुकोन व विद्या बालन ओसीडी बीमारी से ग्रस्त हो चुकी हैं। दवा और मनोरोग विशेषज्ञों के परामर्श के बादसफल व्यावसायिक जीवन जी रही हैं।
ओसीडी – ओबसेसिव कंपलसिव डिस्आर्डर में मनोरोगी एक ही विचार को सोचता रहता है और मानसिक दुविधा को छोड़ नहीं पाता है।
मस्तिष्क में एस्ट्रोजन नामक रसायन की कमी हो जाने से निर्णय लेने की क्षमता बाधित होती है।
सीजोफ्रिनिया में रोजाना कामकाज करने में रोगी असफल रहता है।
तनाव और अवसाद की स्थितियां धीरे – धीरे आत्मघात की ओर ले जाती है क्योंकि आसपास का जीवन नीरस और निराशा देता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए रोजाना तीस मिनट का व्यायाम, सब से घुलना – मिलना, बातचीत, मनोरंजन और पौष्टिक खानपान राम बाण साबित होते हैं।
साइकेट्रिक दवाई और क्लीनिकल मानसिक विशेषज्ञ परामर्श से मनोरोगी को फिर से सामान्य जीवन में लौटा लाते हैं।
मानसिक असंतुलन को स्थिर करने में दो वर्ष भी लग सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ल्ड मैंटल हेल्थ डे के अवसर पर सबके लिए अच्छा जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की योजनायें बनायी हैं।
– भूपत सिंह बिष्ट