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उत्तराखंड मतदाता सूची सुधार में बड़ा खलनायक बनकर उभरा – मैपिंग साफ्टवेयर !

निर्वाचन साफ्टवेयर में वोटर अपडेशन के नाम पर बीएलओ माँग रहे विचित्र प्रमाणपत्र आधारित जानकारियां।

उत्तराखंड मतदाता सूची सुधार में बड़ा खलनायक बनकर उभरा – मैपिंग साफ्टवेयर !
निर्वाचन साफ्टवेयर में वोटर अपडेशन के नाम पर बीएलओ माँग रहे विचित्र प्रमाणपत्र आधारित जानकारियां।

देश में अन्य प्रदेशों के बाद अब एसआईआर प्रक्रिया – मतदाता सूची गहन पुनर्निरीक्षण 2026 का स्वाद

उत्तराखंड के वोटर भी भोग रहे हैं। बूथ लेबल आफिसर – बीएलओ पिछले छह माह से बार – बार वोटर से

मिलते हैं और मतदाता वैरिफिकेशन का काम खत्म होने को नहीं आ रहा है।

CEO UTTARAKHAND VIJAY KUMAR JOGDANDE & DM DEHRADUN DR AASHISH CHAUHAN

उल्लेखनीय है कि सरकार ने करोंड़ो का खर्चकर सभी वोटरों को पहले से ही कोड आधारित

ईपिक कार्ड – वोटर फोटो पहचान पत्र जारी किए हुए हैं। यह वोटर कार्ड पहचान प्रमाणपत्र के रूप में विभिन्न विभागों

और बैंकों में धड़ल्ले से प्रयोग होता आ रहा है।

बीएलओ ने पहले पुरानी वोटर लिस्ट के साथ घर – घर जाकर वोटर की पहचान की और वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट

का डाटा माँगा मानों मतदाता पिछले 25 सालों के विधानसभा और लोकसभा चुनावों का डाटा संभालकर रखता है।

एसआईआर 2026 के जारी आँकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में 11733 बीएलओ ने 71 लाख 33 हजार 785

वोटर गणना प्रपत्र जारी किए।
स्वाभाविक है ये प्रपत्र किसी डाटा बेस आधारित जानकारी पर छापे गए हैं।

जिन वोटरों को एसआईआर फार्म नहीं मिला वो लापता श्रेणी में हैं और उन्हें वोटर कार्ड होने के बावजूद फिर से

फार्म संख्या -6 भरकर नए सिरे से वोटर बनने की प्रक्रिया अब पूरी करनी है।

उत्तराखंड में चल रहे मतदाता गहन पुनर्निरीक्षण अभियान में 13- जिलाचुनाव अधिकारी, 70- रिटर्निंग अधिकारी,

11733 बीएलओ, 1200- सुपरवाइजर बीएलओ और 23315 पोलिटिकल पार्टी के बूथ लेवल एजैंटों ने शिरकत की है।

वैसे पालिटिकल पार्टी के बूथ एजैंट शायद ही कहीं सक्रिय दिखें हैं। अन्यथा चुनाव आयोग के साफ्टवेयर पर

अपनी मैपिंग कराने के लिए दादा – दादी, माता पिता के जन्मतिथि प्रमाणपत्र और वर्ष 2003 में किस विधानसभा में

वोटर रहे का डाटा जुटाने में मतदाता इतने हैरान न हो रहे होते।
विवाहित महिलाओं को अपने मायके से 23 साल पुराना इतिहास निकालकर बीएलओ को देना है। इस के बाद भी

संभव है – निर्वाचन साफ्टवेयर, नाम में त्रुटि, माता – पिता या दादा – दादी की आयु अंतराल को स्वीकार न करें।

चुनाव आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार एसआईआर आरंभ होने पर 79 लाख 60 हजार 762 वोटर थे। इन में

826977 लगभग 10.39 प्रतिशत के प्रपत्र वापस जमा नहीं हुए और ये ट्रांसफर, अनुपस्थित, मृत, दोहरे वोटर या

अन्य श्रेणी में शामिल किए गए हैं।
प्रपत्र वापस जमा करने वाले 71,33,785 वोटरो में पुरूष – 37,23,614, महिला – 34,09,954 और 217 ट्रांस जैंडर हैं।

अब उत्तराखंड के विगत लोकसभा चुनाव 2024 का डाटा देखें तो 28 मार्च 2024 को वैब साइट पर उपलब्ध

जानकारी में कुल 83, 37,914 वोटर दर्ज हैं। इन में पुरूष – 43,17,579, महिला – 40,20,038 और 297 ट्रांसजैंडर

ने अपने पाँच लोकसभा सदस्यों को चुना है।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए वैबसाइट पर जारी डाटा के अनुसार 81लाख 72, 173 वोटर दर्ज थे। इन में

पुरूष – 42 लाख 38,890, महिला – 39 लाख 32,995 और 288 ट्रांस जैंडर ने 5वीं विधानसभा के 70 विधायकों का

चुनाव किया है।
एसआईआर 2026 आरंभ तिथि और 28 मार्च 2024 के मतदाता आंकड़ों में 3 लाख 77,152 का अंतर है यानि

निर्वाचन के नवीनतम साफ्टवेयर या सर्वर ने वोटरों को प्रक्रिया शुरू करने से पहले ही काट – छाँट दिया है।

बूथ लेबल अधिकारी – बीएलओ की मुख्य समस्या मतदाता की पहचान निर्वाचन फोटो कार्ड, निवास पुष्टि के साथ

वर्ष 2003 की वोटर जानकारी और निर्वाचन साफ्टवेयर को स्वीकार्य प्रमाणपत्र को जुटाना भी है।

बीएलओ को एक से ज्यादा बार वोटर के पास आना पड़ा है। जैसे कि पहले पुरानी वोटर लिस्ट आधारित जाँच,

फिर एसआईआर प्रपत्रों को बाँटना, फिर उन्हें संकलित करना, साफ्टवेयर में स्वीकार्य या मैपिंग न होने वाले

वोटर को नोटिस जारी करना, फिर नोटिस के जवाब में प्रमाणपत्र का संकलन और अपडेशन, एसआईआर में

छूट गए इपिक कार्ड नंबर वाले वोटरों का दुबारा से प्रपत्र -6 भराना, उस के लिए प्रमाणपत्र अपलोड करना और

फील्ड वैरिफिकेशन के नाम पर अस्थायी डयूटी कर रहे इन बीएलओ में अधिकांश शिक्षक और अन्य विभागों के

स्थायीकर्मी हैं।

कहा जा सकता है कि मतदाता गहन पुनर्निरीक्षण – एसआईआर 2026 का ध्येय कम्प्यूटर डाटाबेस का

शुद्धिकरण जैसा है और इस में प्राथमिकता वोटर से ज्यादा उसके दिए गए प्रमाणपत्र को मिल रही है।

वोटर को एसआईआर में आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि बनवाने जैसा ही अनुभव मिल रहा है।
फिलहाल 14 जुलाई से 11 सितंबर तक वोटर और बीएलओ नोटिस और सुनवायी में जुटे हैं।

15 सितंबर 2026 को उत्तराखंड राज्य की अंतिम संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन होना है। उस के बाद छूट गए

मतदाता ट्रिब्यूनल के आगे अपना दावा पेश करेंगे।
अभी तक सत्ताधारी और प्रमुख विपक्षी दलों ने वोटर को सहयोग करने के बजाए वेट एंड वाच की भूमिका बनायी हुई है।
– भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार।

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