एक और नियुक्ति परीक्षा आ गई धांधली के घेरे में और प्रक्रिया गई ठंडे बस्ते।
वाह यह भी खूब रही : लड़े सिपाही नाम सरदार का !
वाह यह भी खूब रही : लड़े सिपाही नाम सरदार का !
एक और नियुक्ति परीक्षा आ गई धांधली के घेरे में और प्रक्रिया गई ठंडे बस्ते।
ये पुरानी कहावत तो आपने जरूर सुनी होगी – लड़े सिपाही, नाम सरदार का।
कोई नई बात नहीं, ये पुरानी रीत चली आ रही है।
चुनाव जीता जाता है – जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बूते
लेकिन नाम हमेशा नेता का होता है।

जीवन के हर क्षेत्र में यह परम्परा आसानी से दिख जाती है।
ताजा मामला उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड का है।
खबर है – एक पूर्व मंत्री की बेटी के लिखित परीक्षा में बेहद कम अंक लाने पर भी साक्षात्कार में
अधिकतम अंक दे दिए गए। यानि फिर सिफारशी चयनित होने लग गये !
यह आरोप और घपला उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं को एक छतरी के नीचे लाने वाले
बॉबी पंवार ने दमदार तरीके से उठाया।
अभी दो दिन पूर्व ही उन्होंने इस प्रकरण का न सिर्फ खुलासा किया बल्कि जिम्मेदार अफसरों के
पास मुद्दा पहुंचाया भी किंतु आखिर में श्रेय पा गए विद्यार्थी परिषद वाले।
हुआ यों कि गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने
मुख्यमंत्री से भेंट कर शिकायत बताई कि उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड
के द्वारा किए गए चयन में धांधली हुई है।
लिहाजा चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने भी तत्काल मामले का संज्ञान लिया और चयन प्रक्रिया
स्थगित करने के आदेश पारित कर दिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके साथ ही सम्पूर्ण चयन प्रक्रिया की
गहनता से जांच कराने के निर्देश भी दिए हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश में विभिन्न भर्तियों में धांधलियों को लेकर
मुख्यमंत्री लगातार सख्त रुख दिखाते आए हैं।
सरकार द्वारा कठोर नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है ।
यहां तक कि साक्षात्कार में अंक देने का फार्मूला भी नियत हो गया।
यानी चाक चौबंद व्यवस्था का भरोसा दिलाया गया फिर ऐसा क्या हुआ – चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड
की भर्ती विवादों का केंद्र बन गई।
साक्षात्कार बोर्ड ने ही खेल कर दिया – इस बार नकल माफिया की जगह
दूसरे खिलाड़ी पलीता लगाने आ गए।
जाहिर है पूर्व मंत्री की बेटी कम अंक के बावजूद चयनित हुई तो मामला खुलना ही था।
इसे बॉबी पंवार नहीं तो कोई और उठाता।
इसी क्रम में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने
मुख्यमंत्री से भेंट की।
उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की जा रही
-आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक चिकित्सा की भर्ती में धांधली का संदेह जताया और
चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड की प्रक्रिया की गहनता से जांच करने की मांग कर डाली।
यही मांग दो दिन पहले से बॉबी पंवार भी कर रहे थे लेकिन उनकी बात
शायद ऊपर तक नहीं पहुंच सकी !
बहरहाल सीएम धामी ने शिकायत का संज्ञान ले लिया है – उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड
के द्वारा किये गये चयन को तत्काल स्थगित करते हुए सम्पूर्ण प्रक्रिया की
गहनता से जांच के निर्देश भी दिए हैं।

फिलहाल मामला टल गया है वरना सरकार की फजीहत होनी तय थी
लेकिन इस पूरे प्रकरण में वह सिपाही श्रेय पाने से वंचित रह गया,
जो बेरोजगारों की लड़ाई को बड़ी शिद्दत से लड़ता देखा जा रहा है।
विद्यार्थी परिषद के नेताओं ने अंतराल बाद कर्मठता दिखायी है और अपनी सरकार
को मनाया। ऐसे बेरोजगार डाक्टरों को छल व नाइंसाफी से बचाया।
चलिए फिर सफलता का सेहरा सरदार के सिर ही सजा है – रीत भी यहीहै।
— दिनेश शास्त्री सेमवाल, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार।