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गोहाटी हाईकोर्ट ने माना – पुलिस बुलडोजर प्रयोग बालिवुड कथा !

हाईकोर्ट ने एसपी द्वारा बुलडोजर से पांच आरोपियों के मकान ध्वस्त करने पर लिया संज्ञान।

गोहाटी हाईकोर्ट ने पुलिस बुलडोजर प्रयोग को फिल्मी माना !

हाईकोर्ट ने एसपी द्वारा बुलडोजर से पांच आरोपियों के मकान ध्वस्त करने पर लिया संज्ञान।

 

गोहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आरएम छाया ने एक हिंसा मामले में मकान गिराने की नागांव पुलिस कार्रवाई को गैर कानूनी ठहराया है।

पुलिस ने पांच आरोपियों के मकान बुलडोजर से ध्वस्त कर इन्हें फर्जी दस्तावेजों पर निर्मित अतिक्रमण बताया था।

चीफ जस्टिस ने कहा डेमोक्रेटिक सेटअप में जांच करने वाली एजैंसी बुलडोजर कैसे चला सकती है !

क्या आप हमारा कोर्ट रूम जांच के नाम पर खोद सकते हैं !  पुलिस बिना वारंट के किसी मकान को जांच के नाम पर जेसीबी से गिरा नहीं सकती है।

पुलिस पर आरोप हैं कि पांच मुस्लिम आरोपियों के मकान जांच के नाम पर ध्वस्त किए गए।

इन आरोपियों ने महिलाओं के साथ नागांव का एक पुलिस स्टेशन जला दिया। जहां एक मच्छली बेचने वाले की मौत हो गई थी।

जस्टिस ने पुलिस की कहानी को अविश्वसनीय माना है। असम एसपी लीना डोले की ये बुलडोजर कहानी बालिवुड कथा लगती है।
ऐसे गंभीर मामले में पुलिस जांच के नाम पर क्या कुछ भी कर सकती है, कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछ लिया।
पदचिह्न टाइम्स।

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