आजादी के 75 वर्ष : महिलायें शारीरिक – आर्थिक शोषण पीड़िता !
आईएएस महिला की सेलरी पर पति का एटीएम कार्ड से कब्जा आर्थिक हिंसा - दीपा कौशलम।

आजादी के 75 वर्ष : महिला शारीरिक – आर्थिक शोषण पीड़िता !
आईएएस महिला की सेलरी पर पति का एटीएम कार्ड से कब्जा आर्थिक हिंसा – दीपा कौशलम।
लिंग आधारित हिंसा और भेदभाव को लेकर दीपा कौशलम ने दून लाइब्रेरी सभागार
में अपनी प्रस्तुति दी।
दीपा कौशलम अपने एनजीओ के माध्यम से समाज में महिलाओं की पीड़ा से सहभागिता
रखती हैं।
महिलाओं के प्रति तमाम भेदभाव, आर्थिक व शारीरिक हिंसा और यौन हिंसा के अन्य बिंदुओं पर
दीपा कौशलम ने कटु शब्द चित्रण किये ।
दीपा कौशलम ने दावा किया कि एक महिला आईएएस अधिकारी अपने वेतन को
अपनी इच्छा से खर्च या निवेश नहीं कर पाती है।
उन का पति वेतन पर एटीएम द्वारा कब्जा कर लेता है और ये आर्थिक हिंसा की श्रेणी हैं।
घरेलु हिंसा के प्रावधानों पर जिम्मेदार एजैंसियां जागरूक और संवेदना शून्य दिखती हैं।
मैरिज रेप को बलात्कार नहीं माना जाता है और महिलाओं को तमाम हिंसा और भेदभाव के लिए
समझौता करने पर आमादा किया जाता है।
नीलम ने बताया कि उसे घरेलु हिंसा के तहद छुआछूत का दंश झेलना पड़ रहा है।
मैं खाना बनाती हूं, वंश बढ़ाने के लिए बच्चे पैदा करती हूं लेकिन मेरी सास मुझ से
ऊंच -नीच का व्यवहार करती है।
अंजुम परवीन ने बताया – आठ साल तक तीन तलाक की हिंसा सहने के बाद
उस ने दुबारा शादी की है।
दो हफ्ते में तलाक अविश्वसनीय और अस्वीकार्य था। बड़ी मुश्किल से इस यंत्रणा
से बाहर आयी हूं।
अब एक बेटा, पति और ससुर के साथ नई जिंदगी में हूं। सौ से अधिक महिलाओं को
एनजीओ के तहद आर्थिक निर्भरता पहुंचाने का काम शकून देता है।
शिवानी पांडे ने संचालन करते हुए दोहराया कि हाल में बैठी महिलायें कभी न कभी
शारीरिक हिंसा की शिकार हुई हैं।
देश में साठ लाख से अधिक अपराध वर्ष 2022 में दर्ज हुए हैं – इन मे सत्तर फीसदी
महिलाओं के खिलाफ हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर तीन में से एक महिला यानि 25 प्रतिशत
घरेलु हिंसा की शिकार हो रही हैं।
दीपा कौशलम की ये पहली विचार गोष्ठी रही और आगे सीरीज जारी रहेगी।
— भूपत सिंह बिष्ट, स्वतंत्र पत्रकार।