
कोविड और आर्थिक मंदी में जारी है पोलिटिकल चंदे की बहार !
नेताओं को इसलिए मंहगाई और आम जनता की तंगी महसूस नहीं हो रही ।
चुनाव आयोग ने गुजरात चुनाव के दौरान पोलिटिकल पार्टियों को पिछले साल मिले चंदे की राशि जाहिर कर दी है।
देश के कानून में राजनीतिक दलों को 20 हजार से ज्यादा मिले चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी है।
वैसे सभी दल जनता से चंदा लेने के बावजूद अपना खाता आरटीआई यानि सूचना के अधिकार से बाहर रखने के लिए सहमत हैं।
चुनाव आयोग ने वित्त वर्ष 2021 -22 के आंकड़े सार्वजनिक कर दिये हैं।
सबसे ज्यादा चंदा केंद्र और अधिकांश राज्यों में शासित बीजेपी को 614.53 करोड़ रूपये मिला है।
ये चंदा कांग्रेस के मुकाबले छह गुना ज्यादा है। लगता है – चंदा देने वालों की प्राथमिकता सत्ताधारी पार्टी हैं।
कांग्रेस को 95.46 करोड़ चंदा मिला है। कांग्रेस की सरकार राजस्थान और छतीसगढ़ में हैं।
मध्यप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि राज्यों में विपक्षी सरकार दलबदल के बाद बीजेपी के पक्ष में आ गई।
आम आदमी पार्टी चंदा उगाहने में तीसरे नंबर पर है। आप पार्टी को 44.54 करोड़ चंदा हासिल हुआ।
आप की सरकार दिल्ली और पंजाब राज्य में है।
सीपीएम को 10.05 करोड़ चंदा मिला है और इन की सरकार केरल में चल रही है।
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस को मात्र 43 लाख का चंदा पिछले वित्त वर्ष में मिला है।
चंदे की भरमार के कारण नेताओं को बढ़ती मंहगाई का अहसास नहीं हो पाता है।
सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बांड से पोलिटिकल पार्टी को चंदा देने के खिलाफ संविधान पीठ में सुनवायी भी जारी है।
– भूपत सिंह बिष्ट